नई दिल्ली/इस्लामाबाद। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान ने संधि के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखा है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि साझा जल संसाधनों को राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि नदियों का पानी दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने का साधन होना चाहिए। उनका कहना था कि यदि जल प्रवाह में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो इसका असर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर पड़ सकता है। उन्होंने इस विषय को बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया।
पाकिस्तान ने यह भी दोहराया कि सिंधु जल संधि कई दशकों से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रही है। पाकिस्तान का कहना है कि इस व्यवस्था में किसी भी एकतरफा बदलाव से दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
इस दौरान पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सहयोग की अपील की। इशाक डार ने कहा कि साझा प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में वैश्विक नियमों और समझौतों का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
वहीं, पाकिस्तान के मंत्री मुसादिक मलिक ने भी संधि को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता लंबे समय से दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच जल प्रबंधन का आधार बना हुआ है। उनके अनुसार, यदि ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता कमजोर होती है तो वैश्विक स्तर पर स्थापित नियमों और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ सकते हैं।
सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।