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भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) से जुड़ा विधेयक सदन में पेश कर दिया। विधेयक पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। सरकार ने इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने कई प्रावधानों पर सवाल उठाए।
सरकार की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक संविधान की भावना के अनुरूप सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करने की दिशा में तैयार किया गया है।
वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से संवाद होना चाहिए था। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और विस्तृत विचार-विमर्श की मांग की। इसी मुद्दे को लेकर सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित UCC में महिलाओं और पुरुषों के अधिकारों को समान महत्व देने, विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाने तथा कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही सरकार का कहना है कि अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने तर्क रखेंगे, जिसके बाद विधेयक पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह विधेयक मध्य प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ कानूनी और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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