श्री दिनेश सोलंकी
मेरी पसंद बनी सबकी पसंद
1975 शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महू में राष्ट्रीय सेवा योजना का हस्तलिखित दीवार पत्र शौकिया रूप से निकालते हुए चस्का जागा प्रिंट मीडिया में छपने का। 1979 से ’नई दुनिया‘ के पत्र स्तम्भ से चली कलम ने ’प्रिय पाठक‘ अखबार को जन्म दे दिया है।
नईदुनिया के लगभग प्रत्येक स्तम्भ में छपने के बाद दैनिक भास्कर से प्रतिनिधि बतौर काम करना शुरू किया। राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाएं जैसे जनसत्ता, संडे मेल, हिन्दुस्तान, धर्मयुग, सरिता, मुक्ता, भू भारती, सच्ची कहानियां आदि में स्वतंत्र लेखन के साथ ही 1984 से 1999 तक क्रमशः दैनिक भास्कर, नवभारत, फ्री प्रेस में महू प्रतिनिधि के रूप में काम किया। लोकस्वामी, चेतना और एसडीए टाइम्स में भी कुछ-कुछ माह कार्य किया।
हमारी प्राथमिकता समाज और पाठकों का हित है।
हम किसी पक्ष या विचारधारा से नहीं, केवल सत्य से जुड़ते हैं।
1975 से सतत और समर्पित पत्रकारिता की विरासत।
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